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Thursday, October 25, 2007

फिक्र-ए-तामीर-ए-आशियाँ भी है

fikr-e-taameer-e-aashiaN bhi hai

फिक्र-ए-तामीर-ए-आशियाँ भी है
खौफ-ए-बे माहरी-ए-खिजाँ भी है

खाक भी उड़ रही है रास्तों में
आमद-ए-सुबह-ए-समाँ भी है

रंग भी उड़ रहा है फूलों का
गुंचा गुंचा सर्द-फसाँ भी है

ओस भी है कहीं कहीं लरज़ाँ
बज़्म-ए-अंजुमन धुआँ धुआँ भी है

कुछ तो मौसम भी है ख़याल अंगेज़
कुछ तबियत मेरी रवाँ भी है

कुछ तेरा हुस्न भी है होश-रुबा
कुछ मेरी शौकी-ए-बुताँ भी है

हर नफ्स शौक भी है मंजिल का
हर कदम याद-ए-रफ्तुगाँ भी है

वजह-ए-तस्कीं भी है ख़याल उसका
हद से बढ़ जाये तो गिराँ भी है

ज़िन्दगी जिस के दम से है नासिर
याद उसकी अज़ाब-ए-जाँ भी है

नासिर काज़मी

रंग बरसात ने भरे कुछ तो

rang barsaat ne bhare kuch to

रंग बरसात ने भरे कुछ तो
ज़ख्म दिल के हुए हरे कुछ तो

फुरसत-ए-बेखुदी गनीमत है
गर्दिशें हो गयीं परे कुछ तो

कितने शोरीदा सर थे परवाने
शाम होते ही जल मरे कुछ तो

ऐसा मिलना नहीं तेरा मिलना
दिल मगर जुस्तजू करे कुछ तो

आओ ! नासिर कोई गज़ल छेड़ें
जी बहल जायेगा अरे कुछ तो

नासिर काज़मी

Wednesday, October 24, 2007

किसे देखें कहाँ देखा ना जाये

kise dekhein kahaaN dekha na jaye

किसे देखें कहाँ देखा ना जाये
वो देखा है जहाँ देखा ना जाये

मेरी बरबादियोँ पर रोने वाले
तुझे महव-ए-फुगाँ देखा ना जाये

सफ़र है और गुरबत का सफ़र है
गम-ए-सद-कारवाँ देखा ना जाये

कहीं आग और कहीं लाशों के अंबार
बस ऐ दौर-ए-ज़मीँ देखा ना जाये

दर-ओ-दीवार वीराँ, शमा मद्धम
शब-ओ-गम का सामान देखा ना जाये

पुरानी सुहब्बतें याद आती है
चरागों का धुआ देखा ना जाये

भरी बरसात खाली जा रही है
सराबर-ए-रवाँ देखा ना जाये

कहीं तुम और कहीं हम, क्या गज़ब है
फिराक-ए-जिस्म-ओ-जाँ देखा ना जाये

वही जो हासिल-ए-हस्ती है नासिर
उसी को मेहेरबाान देखा ना जाये

Nasir Kazmi

Saturday, October 6, 2007

करता उसे बेकरार कुछ देर

karta use beqarar kuch der

करता उसे बेकरार कुछ देर
होता अगर इख्तियार कुछ देर

क्या रोयें फ़रेब-ए-आसमाँ को
अपना नहीं ऐतबार कुछ देर

आँखों में कटी पहाड़ सी रात
सो जा दिल-ए-बेक़रार कुछ देर

ऐ शहर-ए-तरब को जाने वालों
करना मेरा इन्तजार कुछ देर

बेकैफी-ए-रोज़-ओ-शब मुसलसल
सरमस्ती-ए-इन्तेज़ार कुछ देर

तकलीफ-ए-गम-ए-फिराक दायम
तकरीब-ए-विसाल-ए-यार कुछ देर

ये गुनचा-ओ-गुल हैं सब मुसाफिर
है काफिला-ए-बहार कुछ देर

दुनिया को सदा रहेगी नासिर
हम लोग हैं यादगार कुछ देर

नासिर काज़मी